एआईआईएफए (AIIFA) सस्टेनेबल स्टील मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, जो देशभर में 1,800 से अधिक सदस्यों का प्रतिनिधित्व करती है, ने भारत के इस्पात क्षेत्र की मजबूती और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए मानकों, सतत विकास प्रथाओं और कराधान में व्यापक सुधार की मांग की है।
देश के कुल इस्पात उत्पादन में लगभग 47% योगदान देने वाला द्वितीयक इस्पात क्षेत्र विकेन्द्रीकृत औद्योगिक विकास, अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, और 2030 तक 300 मिलियन टन इस्पात क्षमता के भारत के लक्ष्य को समर्थन देने में अहम भूमिका निभा रहा है।
एआईआईएफए स्टील मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ महाराष्ट्र (SMAM) के सहयोग से, भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय के संरक्षण में और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के समर्थन से, एआईआईएफए स्टीलैक्स-2025 (STEELEX-2025) का आयोजन करेगा, जिसे व्यापक रूप से इस्पात उद्योग का “महाकुंभ” माना जाता है।
यह कार्यक्रम 19–20 सितम्बर 2025 को बॉम्बे एक्ज़िबिशन सेंटर, गोरेगांव, मुंबई में 37वें राष्ट्रीय इस्पात सम्मेलन के साथ आयोजित होगा। इसका मुख्य विषय होगा – “वन इंडस्ट्री, वन डेस्टिनेशन” (एक उद्योग, एक गंतव्य)। इसमें 300 से अधिक प्रदर्शक और 3,500 से ज्यादा प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है। चर्चा के मुख्य बिंदु होंगे: डिकार्बोनाइजेशन, हाइड्रोजन-आधारित इस्पात निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा का समावेश, कच्चे माल की सुरक्षा, सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल और यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसी वैश्विक व्यापार चुनौतियां।
एआईआईएफए सस्टेनेबल स्टील मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश मंधानी ने बीआईएस (BIS) मानकों की समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत की विविध भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए “वन-साइज-फिट्स-ऑल” (एक जैसा नियम सबके लिए) दृष्टिकोण उपयुक्त नहीं है।
मंधानी ने आगे कहा कि ग्रीन स्टील की ओर संक्रमण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता ही नहीं बल्कि रणनीतिक विकास का अवसर भी है।
एआईआईएफए सस्टेनेबल स्टील मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के मानद महासचिव कमल अग्रवाल ने एक और गंभीर मुद्दे पर प्रकाश डाला- स्क्रैप लेनदेन में जीएसटी अनुपालन ।

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