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बिहार के पूर्णिया में हैवानियत के खेल ने छीन ली महादलितों की खुशहाली, दरिंदगी की दास्तां सुनाकर सिहर जाते हैं लोग

महादेश्वर झा, संवादाता. बिहार के पूर्णिया जिले में खपड़ा पंचायत के मझवा गांव की महादलित बस्ती. पांच दिन पहले तक यहां महादलित परिवारों का बड़ा गांव आबाद था पर आज वहां कहीं राख की ढेर है तो कहीं बांस की टूटी बत्तियों पर लटकती टूटी टाट. बांस और फूस की जली अधजली झोंपड़ियां, बरसाती जमीन पर बिखरे सामान और उजड़े हुए गरीबों के आशियाने आज पांच दिनों के बाद भी दरिन्दगी की बानगी बयां कर रहे हैं. यहां के हर चेहरे पर अनजाना खौफ है और हर आंखें मूक भाव से हैवानियत की दास्तां सुना रही हैं।

किसी की बांह पर लाठी के लाल निशान हैं तो किसी के माथे पर गहरी चोट यह बताने के लिए काफी है कि हजारों के हुजूम ने कैसे महादलितों की बस्ती को तीन तरफ से घेर कर आग के हवाले कर दिया. यह अलग बात है कि इस घटना के बाद बायसी के इलाके में महादलितों की सुरक्षा को लेकर कई सुलझे-अनसुलझे सवाल खड़ा हो गए हैं जिसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है. परमान नदी के किनारे बसे इस गांव में करीब साढे चार सौ महादलित परिवार हैं. इसमें 13 महादलित परिवार के घर जले हैं. एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं. इनमें एक रिटायर्ड चौकीदार की मौत हुई है।

बताया जाता है कि बीते बुधवार की रात मझुआ गांव में जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया. इस घटना में दो महादलित बुरी तरह घायल हो गये थे. इस घटना के बाद उसी रात करीब साढ़े 11 बजे हमलावरों ने तीन तरफ से महादलित परिवार पर हमला बोल दिया. हमलावरों ने कई घरों में आग लगा दी और बेरहमी से पिटाई की. घटना के बाद जिला प्रशासन की ओर से गांव में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता कर दी गयी है।

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