नई दिल्ली : एनएमडीसी और फिक्की ने आने वाली 23 और 24 अगस्त, 2022 को होटल ताज पैलेस, डिप्लोमैटिक एन्क्लेव नई दिल्ली में “ट्रांज़िशन टूवर्ड्स 2030 और विजन 2047” थीम के साथ भारतीय खनिज और धातु उद्योग पर एक सम्मेलन का आयोजन करने की घोषणा की है।
दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन भारत की स्वतंत्रता के 75 गौरवशाली वर्षों और केंद्रीय इस्पात और खान मंत्रालयों के सहयोग से चल रहे “आजादी का अमृत महोत्सव” के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। आयोजन का मुख्य उद्देश्य “विजन 2047” के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए खनिज और धातु क्षेत्र के भविष्य के रोडमैप पर विचार-विमर्श करना है।
कॉन्फ्रेंस में उद्योग, नीति और शिक्षा जगत के वक्ताओं द्वारा प्रमुखता से भाग लिया जाएगा। वैश्विक और घरेलू उत्पादक, खनिज संगठन, नीति निर्माता, खान उपकरण निर्माता, वैश्विक कंपनियों के कंट्री हेड, केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी सहित अन्य लोग कॉन्फ्रेंस में उपस्थित होंगे और अलग अलग विषयों पर अपने विचार रखेंगे।

कॉन्क्लेव में वैश्विक और भारतीय खनिजों और धातु उद्योगों पर विचार-विमर्श और संबंधित मुद्दों का विश्लेषण, अलग अलग क्षेत्रों में खानों के क्षेत्र में उभरती नई टेक्नोलॉजीज को लेकर बातचीत और अपेक्षित नीतिगत माहौल को लेकर विस्तार से बातचीत शामिल है।
कॉन्क्लेव के बारे में जानकारी देते हुए *श्री सुमित देब, चेयरमैन, फिक्की माइनिंग कमेटी और चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, एनएमडीसी लिमिटेड* ने बताया कि देश में मौजूद खनिज संसाधनों के विशाल आधार और विकसित और आसान व्यापार और नियामक वातावरण को देखते हुए, कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी घरेलू कंपनियों के साथ-साथ देश की खदानों और खनिज उद्योग में काफी अधिक दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
श्री देब ने कहा कि “उद्योग, केंद्र और राज्यों सहित सभी संबंधित एवं प्रासंगिक हितधारकों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है और आगामी कॉफ्रेंस आपसी सहयोग को मजबूत करने और आगे की योजना को मजबूत करने के लिए एक बेहतर प्लेटफॉर्म रूप में काम करेगी। चुनौतियों और बाधाओं को दूर करना और उनका समाधान खोजना प्रगति का आधार है और कॉन्क्लेव उसके लिए सही मंच प्रदान करेगा।”
श्री सुमित देब ने कहा कि “भारत में माइनिंग सेक्टर बिजनेस ईकोसिस्टम को आसान बनाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सुधारों के साथ एक बेहतर एवं आदर्श बदलाव के दौर से गुजर रहा है। आसान और कुशल निर्णय हमारी नीति बनाने में महत्वपूर्ण रहा है और नीति निर्माण को और आसान बनाने और समयबद्ध और विवेकपूर्ण तरीके से मंजूरी प्राप्त करने में मदद करने के लिए मानदंड तैयार किए जा रहे हैं।”
*श्री डी के मोहंती, निदेशक (उत्पादन), एनएमडीसी लिमिटेड* ने कहा कि “देश आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है और आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। खान और खनिज उद्योग विकास के लिए भारत की भविष्य की योजनाओं में एक प्रमुख भूमिका निभाएंगे क्योंकि देश को “आत्मनिर्भर भारत” में बदलने के लक्ष्य को जल्द से जल्द प्राप्त करना है।”
*सुश्री ज्योति विज, उप महासचिव, फिक्की* कहा कि खान और खनिज क्षेत्र सरकार की निर्णय लेने की प्रक्रिया के मूल में है और सरकार का लक्ष्य है कि घरेलू संसाधनों का अधिकतम उपयोग प्राप्त करना है, जिससे रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा और देश के विभिन्न हिस्सों में तेजी से आर्थिक विकास होगा।
आगामी कॉन्फ्रेंस में नए युग के खनिजों, डिजिटलीकरण और ऑटोमेशन और अन्य तकनीकी इनोवेशंस पर भी विचार-विमर्श होगा। यह कार्यक्रम दुनिया भर में खनिजों और धातुओं के भविष्य पर एक कंट्री पैनल चर्चा का भी गवाह बनेगा। इस दौरान कई नए संबंधित विषयों पर बातचीत की जाएगी।
कॉन्फ्रेंस खनिजों और धातुओं के लिए वैश्विक वस्तु बाजार को समझने में सक्षम होगा, खनिज विकास और आर्थिक विकास के बीच अंतर-संबंध को उजागर करेगा, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऐसा घटनाक्रम जो भारतीय खनिजों और धातु उद्योग को प्रभावित कर सकता है और भारतीय खनिजों और धातु उद्योग में अन्य अवसरों की पहचान कर सकता है।
भारत अधिकांश खनिजों से संपन्न है और ईंधन, परमाणु, धातु, गैर-धातु और लघु खनिजों सहित 95 खनिजों का उत्पादन करता है।
काफी क्षेत्रों में अभी तक महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों का अभी तक खनन नहीं होने, नए खनिजों की खोज में कई तरह की कमियों को दूर करते हुए खनन कंपनियों के पास देश को देने के लिए बहुत कुछ है। इसके अलावा, शहरीकरण की तीव्र गति के साथ, यह उम्मीद की जाती है कि विशेष रूप से बुनियादी ढांचे और विनिर्माण क्षेत्रों से खनिज और धातुओं की मांग में आने वाले सालों में भी लगातार वृद्धि होगी। ऐसे में आपूर्ति और मांग में संतुलन बनाए रखने के लिए, ये उद्योग देश में तेजी ला सकता है और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में बड़े पैमाने पर योगदान दे सकता है।

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