अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र, गुरुग्राम के संस्थापक विश्व शांतिदूत जैन आचार्य लोकेश जी ने शुक्रवार देर रात को नई दिल्ली के द ओबेरॉय होटल में ईरान के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. मसूद पेज़ेशकियान से मुलाकात की। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान यह विशेष मुलाकात भारत स्थित ईरान के इस्लामी गणराज्य के दूतावास द्वारा आयोजित अनौपचारिक संवाद के दौरान हुई।इस अवसर पर विश्व शांति शिखर सम्मेलन के लिए भारत के पहले विश्व शांति केंद्र एवं अहिंसा विश्व भारती संस्था की ओर से जैनाचार्य लोकेशजी ने राष्ट्रपति मसूद को आमंत्रित किया जिसे राष्ट्रपति ने सहर्ष स्वीकार किया।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने विश्व शांति एवं मानवता के लिए जैन आचार्य डॉ. लोकेश जी द्वारा किए जा रहे वैश्विक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आचार्य लोकेशजी ने अमेरिका से लेकर ईरान तक शांति, अहिंसा और मानवता का संदेश पहुंचाने का निरंतर प्रयास किया है। “भारत और ईरान के संबंध केवल राजनयिक संबंध नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की साझा सभ्यतागत, सांस्कृतिक और मानवीय विरासत पर आधारित हैं। ईरान भारत के साथ अपने संबंधों को अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है |
इस अवसर पर आचार्य लोकेशजी ने कहा कि विश्व में स्थायी शांति केवल राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए धार्मिक नेताओं, आध्यात्मिक संस्थाओं, बुद्धिजीवियों और समाज के सभी वर्गों के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मतभेदों को संघर्ष का कारण बनाने के बजाय संवाद और समझ का माध्यम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि “दुनिया को युद्ध से नहीं, संवाद से समाधान मिलेगा; नफरत से नहीं, करुणा से मानवता आगे बढ़ेगी। भारत और ईरान यदि मिलकर शांति का संदेश लेकर आगे बढ़ें तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।”
अवसर पर “Ambassador of Peace Acharya Lokesh” नामक पुस्तक महामहिम को भेंट की गई।
इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक नेताओं, बुद्धिजीवियों तथा उद्योग एवं व्यवसाय जगत के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह संवाद भारत और ईरान के बीच शांति, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा मानवीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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