दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ एक बार फिर सुर्खियों में है। कानूनी और सर्टिफिकेशन से जुड़ी लंबी अड़चनों के बाद 3 जुलाई को फिल्म को जी5 पर रिलीज किया गया, लेकिन कुछ ही समय बाद इसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। अब इस फैसले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
दरअसल, फिल्म साल 2022 में बनकर तैयार हो गई थी, लेकिन सर्टिफिकेशन विवाद के चलते इसकी रिलीज लगातार टलती रही। यही वजह रही कि 2023 में यह फिल्म टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी अपना तय प्रीमियर नहीं कर सकी।
फिल्म की कहानी मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है। खालरा ने 1984 से 1994 के बीच पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों और हजारों लापता लोगों के मामलों की जांच की थी। उनकी रिपोर्ट ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया था।
बताया जाता है कि 6 सितंबर 1995 को अमृतसर स्थित उनके घर के बाहर से उनका कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया, जिसके बाद वे कभी वापस नहीं लौटे। उनके गायब होने के बाद उनकी पत्नी परमजीत कौर खालरा ने न्याय की लड़ाई जारी रखी और वर्षों तक इस मामले को जीवित रखा।
अब जसवंत सिंह खालरा के संघर्ष पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ की रिलीज और फिर अचानक हटाए जाने से विवाद एक बार फिर गहरा गया है। फिल्म को लेकर कानूनी, राजनीतिक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल फिर से चर्चा के केंद्र में हैं।

Comment here