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बॉम्बे हाईकोर्ट ने वकील को हथकड़ी पहनाने के मामले में मुंबई पुलिस को लगाई फटकार

राष्ट्र समाचार, मुम्बई संवादाता: बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि कितने पुलिस स्टेशन में सीसीटीवी कैमरा नहीं हैं। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि आखिर इन पुलिस स्टेशनों में अभी तक सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं लगाए जा सके? जबकि सुप्रीम कोर्ट ने सभी पुलिस स्टेशनो में सीसीटीवी लगाना अनिवार्य किया है।

यह सवाल करते हुए हाईकोर्ट ने अपहरण से जुड़े एक मामले में गिरफ्तारी के बाद एक वकील को हथकड़ी लगाने को लेकर पुलिस के प्रति कड़ी नाराजगी जताई। इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के सवालों का जवाब न देने के लिए पुलिस को कड़ी फटकार लगाई।
कोर्ट ने कहा कि आरोपी (वकील) क्या इतने बडे अपराधी थे कि उन्हें हथकड़ी पहननी पड़ी। न्यायमूर्ति एस जे काथावाला व न्यायमूर्ति एस पी तावड़े की खंडपीठ ने अधिवक्ता विमल झा की गिरफ्तारी को लेकर लॉयर फ़ॉर जस्ट सोसाईटी व अधिवक्ता झा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पुलिस को यह फटकार लगाई।

याचिका में पिछले माह खारघर पुलिस स्टेशन की ओर से गई अधिवक्ता झा की गिरफ्तारी को अवैध बताया गया है। याचिका के मुताबिक आरोपी झा को 3 अप्रैल 2021 को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें 5 अप्रैल 2021 को मैजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। जबकि नियमों के मुताबिक आरोपी को गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर मैजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना चाहिए। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोर्ट की इजाजत के बिना किसी भी आरोपी को हथकड़ी नहीं लगाई जा सकती है। फिर भी पुलिस ने याचिकाकर्ता को हथकडी लगाई थी।

इससे पहले सरकारी वकील दीपक ठाकरे ने याचिका में पुलिस पर लगाए गए आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि आरोपी को चार अप्रैल 2021 को गिरफ्तार किया गया था और पांच अप्रैल 2021 को मैजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। आरोपी को 3 अप्रैल 2021 को पुलिस स्टेशन में सिर्फ बुलाया गया था। लेकिन एफआईआर 4 अप्रैल 2021 को दर्ज की गई थी। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े एक अन्य आरोपी ने बताया था कि झा पुलिस की हिरासत से फरार होने वाला है इसलिए उन्हें हथकडी पहनाई गई थी।

इस पर खंडपीठ ने सरकारी वकील को संबंधित पुलिस स्टेशन की सीसीटीवी फुटेज पेश करने को कहा। जवाब में सरकारी वकील ठाकरे ने कहा कि आरोपी को 4 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था लेकिन पुलिस स्टेशन में 1 मई 2021 को सीसीटीवी लगा है। इसलिए सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं हैं। इस पर खंडपीठ ने सरकारी वकील ठाकरे को सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की याद दिलाई जिसमें पुलिस स्टेशन में सीसीटीवी कैमरा लगाना अनिवार्य किया गया है।

खंडपीठ ने सरकारी वकील से पूछा कि कितने पुलिस स्टेशन में सीसीटीवी कैमरा नहीं है और इसकी वजह क्या है? किस पुलिस अधिकारी ने आरोपी को पुलिस स्टेशन बुलाया था? आखिर इस मामले में लगातार झूठ क्यों बोला जा रहा है। क्या इस मामले का आरोपी इतना बड़ा अपराधी है कि उन्हें हथकडी पहनाई गई।

खंडपीठ ने पुलिस को इस मामले में हलफनामे दायर करने को कहा है और आरोपी की गिरफ्तारी से लेकर जांच कर ब्यौरा मांगा है। आरोपी की ओर से अधिवक्ता सुभाष झा व प्रशांत पांडे ने पक्ष रखा।
फिलहाल पुलिस ने अपनी गलती मानते हुए माफी मांग ली है।
मामला न्यायालय के अधीन अभी भी लम्बित है।

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