नई दिल्ली। दशकों तक भारतीय इतिहास में जनजातीय योद्धाओं के शौर्य, संघर्ष और बलिदान की गाथाओं को अपेक्षित स्थान नहीं मिला। इन वीर योद्धाओं के अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से लेखक राजपाल सिंह चौहान की काव्य पुस्तक ‘रणभेरी’ एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई है। इसी क्रम में दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित जैन बुक डिपो में ‘रणभेरी’ के लेखक से मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
भारत का प्रथम जनजातीय योद्धाओं को समर्पित काव्य होने का दावा करने वाली ‘रणभेरी’ में देश के उन वीर योद्धाओं की गौरवगाथा को काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिनके बलिदान और संघर्ष को व्यापक पहचान दिलाने की आवश्यकता है। पुस्तक को पाठकों और साहित्य प्रेमियों से सराहना मिल रही है। साथ ही, बेस्टसेलर के रूप में इसकी पहचान ने भी पुस्तक को चर्चा में ला दिया है।
कार्यक्रम में विचारक रामेश्वर आर्य, प्रोफेसर मूलचंद सिंह, डेली डायरी न्यूज नेटवर्क के संस्थापक प्रखर वार्ष्णेय, क्रिएटिव डायरेक्टर अमित बलूनी, कंटेंट क्रिएटर मयंक विधायक, देवाशीष, मान सिंह, सहित अन्य प्रमुख साथी उपस्थित रहे। इस अवसर पर पुस्तक के विषय, जनजातीय योद्धाओं के ऐतिहासिक योगदान और साहित्य के माध्यम से उनकी गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के महत्व पर चर्चा हुई।
लेखक राजपाल सिंह चौहान की ‘रणभेरी’ का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक वीरता का वर्णन करना नहीं, बल्कि उन जनजातीय नायकों के संघर्ष और बलिदान को पाठकों के सामने लाना भी है, जिनकी कहानियाँ व्यापक जनमानस तक पहुँचनी चाहिए। दिल्ली में आयोजित यह लेखक से मिलन कार्यक्रम साहित्य प्रेमियों और पुस्तक के पाठकों के लिए विशेष अवसर रहा। बतादें राजपाल सिंह इससे पहले अपने गानों और कविताओं के लिए चर्चा में रह चुके हैं।

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