सुकीर्ति गुप्ता “न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते” श्रीमद्भगवद्गीता का यह दिव्य वचन केवल श्लोक नहीं, बल्कि जीवन का सार है। जब किसी साधारण मन में
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