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बेल बाटम मूवी रिव्यू

नई दिल्ली : कोरोना जैसी महामारी के बाद अब फिल्म प्रेमियों के लिए नई खुशखबरी आई है| मनोरंजन एवं देशभक्ति से भरपूर अक्षय कुमार स्टारर फिल्म “बेल बाटम” सिनेमा हाल में रिलीज हो रही है | यह फिल्म अपने किरदार और कहानी की वजह से खूब चर्चा में भी है| जो दर्शकों के दिलों पत्र राज करने वाली है |
निर्देशक रंजीत एम तिवारी और निर्माता वाशु भगनानी, जैकी भगनानी, दीपशिखा देशमुख की पूजा एंटरटेनमेंट और निखिल अडवानी की एमी एंटरटेनमेंट की फिल्म ‘बेल बॉटम’ से। निर्माता इसे थिएटर में लाने का साहस किया, वो भी तब जब महाराष्ट्र जैसे बड़े सेंटर में सिनेमाहॉल खुले नहीं हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि निर्माता-निर्देशक ने सिनेमा हॉल्स की रौनक लौटाने का भार अक्षय कुमार के कंधों पर डाला है और अक्षय ने यह जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। कोरोना काल में शूट हुई देशभक्ति वाली इस फिल्म को आजादी की 75 वीं सालगिरह पर 3D फॉर्मेट में रिलीज करना यकीनन एक अरसे से थिएटर जाने को लालायित दर्शकों के लिए मनोरंजक पैकेज साबित होगा।
सच्ची घटनाओं से प्रेरित इस फिल्म की कहानी एक रॉ ऐजेंट की है, फिल्म की पृष्ठ्भूमि अस्सी के दशक की है। यह वो दौर था, जब देश एक के बाद एक करके लगातार कई हाइजेक्स का शिकार हो चुका था। एयर प्लेन के इन हाइजेक्स में देश को निगोशिएशन के दौरान आतंकियों को यात्रियों की जान के एवज में करोड़ों रुपये की मोटी रकम तो देनी पड़ती है, मगर साथ ही हर बार भारतीय जेल में बंद खूंखार आतंकवादियों को भी रिहा करना पड़ता है।
फिल्म का फर्स्ट हाफ कहानी और किरदारों को डेवलप करने के चक्कर में थोड़ा स्लो लगता है, मगर सेकंड हाफ में कहानी का थ्रिलर आस्पेक्ट फिल्म को मजबूत बनाता है। फिल्म के दूसरे भाग में कई टर्न और ट्विस्ट हैं, जो दर्शकों को बांधे रखते हैं। अस्सी के दशक को निर्देशक पर्दे पर साकार करने में कामयाब रहे हैं।
अक्षय कुमार एक बार फिर अपने हीरोइक अंदाज में नजर आते हैं। एक लंबे अरसे से वे इस तरह की देशभक्ति वाले किरदार में नजर आते रहे हैं। वे इस तरह की देशभक्ति वाली फिल्मों के पोस्टर बॉय बन चुके हैं। इन किरदारों में उनकी सहजता देखते बनती है, मगर इस बार उन्होंने अंशुल मल्होत्रा उर्फ़ ‘बेल बॉटम’ के चरित्र को अपनी विशिष्ट शैली से अलग अंदाज में परोसा है।

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